प्रकृति का प्रहार: बांग्लादेश का चटगांव पोर्ट पूरी तरह ठप, 1000 जहाज फंसे; जानिए भारत पर क्या होगा इसका असर?
पड़ोसी देश बांग्लादेश इस समय भारी बारिश और समुद्री तूफान के भीषण संकट से जूझ रहा है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाला सबसे बड़ा 'चटगांव बंदरगाह' (Chittagong Port) पूरी तरह से ठप पड़ गया है। समंदर में उठ रही विनाशकारी लहरों और प्रशासन के चेतावनी सिग्नलों के कारण माल की लोडिंग-अनलोडिंग का काम पूरी तरह से रोक दिया गया है।
प्रतिदिन 14 करोड़ का नुकसान, गारमेंट उद्योग बर्बादी की कगार पर
कर्णफुली नदी में 1,000 से अधिक छोटे मालवाहक जहाजों को लंगर डालने पर मजबूर होना पड़ा है, जबकि 55 से अधिक विशालकाय जहाज बीच समंदर में फंसे हुए हैं। इस प्राकृतिक आपदा के कारण बांग्लादेश को प्रतिदिन 11 से 14 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। हर दिन भेजे जाने वाले 11,000 कंटेनरों का आवागमन रुक गया है। इससे वहां की रेडीमेड गारमेंट सप्लाई चेन पूरी तरह से टूट गई है और विदेशी ऑर्डर्स के रद्द होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
भारत (Bharat) के निर्यातकों और व्यापार पर असर:
इस संकट का असर केवल बांग्लादेश तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत से होने वाले व्यापार पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। भारत से बांग्लादेश भेजे गए मालवाहक जहाज भी बीच रास्ते में फंस गए हैं। गौरतलब है कि भारत से भारी मात्रा में गारमेंट के लिए कपास (Cotton), धागे, रसायन (Chemicals), खाद्य पदार्थ और अन्य कृषि उत्पाद बांग्लादेश निर्यात किए जाते हैं।
चटगांव पोर्ट पर लगे इस ब्रेक के कारण सैकड़ों भारतीय ऑर्डर्स फिलहाल अटक गए हैं। हालांकि, भारत का मजबूत व्यापारी वर्ग और हमारी सशक्त अर्थव्यवस्था इस अस्थाई झटके को सहने में पूरी तरह सक्षम है, लेकिन सप्लाई चेन के इस तरह बाधित होने से कच्चे माल की आपूर्ति में देरी हो रही है।